Tue Jul 27 2010 21:55:27 GMT+0530 (India Standard Time)
मौसम के नाम से संसद का सदन भी सजा हंगामे के आसार पर। पीएम ने सफाई दी लेकिन तैयारी तो कुछ और ही है। मुखालफत कर रही जमात के लिए गुजरात से बड़ा मुद्दा है महंगाई। भोपाल के दर्द की तस्वीर भी संसद में पेश करेगी। हिंदुस्तान- पाकिस्तान के रिश्तों पर उसे सरकार से जवाब चाहिए। सरकार भी तैयारी कर चुकी है। अब तक सदन से बाहर बरसते थे विरोधी बादल, लेकिन इस बार संसद पहुंच चुका है मॉनसून।
सोमवार को बुलाया गया संसद का मॉनसून सत्र औपचारिकता तक ही सिमटा रहा। लेकिन मुश्किलें मंगलवार के इंतजार में हैं। विपक्ष ने तमाम तैयारियां कर रखी हैं। सरकार के खिलाफ उसके इतने सवाल हैं कि सोमवार को बिना चर्चा और उनके जवाब जाने वह सरकार को एक कदम भी आगे नहीं बढ़ने देगा। 24 बैठकों में चालीस सवालों की फेहरिस्त देकर विपक्ष स्पीकर को भी इस बात का एहसास करा चुका है कि मॉनसून में वह खूब बरसने वाला है। संसद के मॉनसून सत्र की सोमवार को भले ही औपचारिक शुरुआत हो गई हो, लेकिन सत्र सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली साबित होने जा रही है। मंगलवार से सदन पूरी तरह से अपने शबाब पर होगा। करगिल दिवस के चलते सोमवार को सदन की कार्रवाई महज़ औपचारिकता तक सिमट कर रह गई। लेकिन सरकार के लिए मुश्किलें तो अब आनी हैं। जब मंगलवार को सदन की कार्रवाई शुरू होगी और विपक्ष अपने महंगाई के मुद्दे के साथ सरकार के सामने काम रोको प्रस्ताव लेकर आएगा। इसकी बानगी हालांकि सोमवार को ही देखने को मिल चुकी है। लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार के सामने विपक्ष ने 24 बैठकों वाले सदन में 40 मुद्दों की फेहरिस्त पेश कर दी है। इनमें से चंद मुद्दे तो सरकार के लिए गले की फांस ही बन गए हैं। विपक्ष खास तौर पर इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
विपक्ष की रणनीति, सरकार की मुश्किल!
महंगाई मुद्दे पर समूचा विपक्ष एकजुट, समाजवादी पार्टी भी सरकार के मुखालिफ।
भारत- पाक वार्ता की विफलता पर सरकार को घेरने की तैयारी।
भोपाल गैस कांड के आरोपियों को देश से बाहर जाने में कांग्रेसी भूमिका पर सवाल।
नक्सलवाद के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी।
भ्रष्टाचार मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी।
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में देरी विपक्ष के लिए मुद्दा।
अमित शाह की सीबीआई जांच और गिरफ्तारी पर बीजेपी की विशेष रणनीति।
इनमें से महंगाई मुद्दे पर तो समूचा विपक्ष ही सरकार की मुखालफत करता दिख रहा है। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि इस मुद्दे पर कुछ ऐसे दल भी उसकी मुखालफत करते दिख रहे हैं जो परोक्ष रूप से अब तक उसकी मदद करते आए हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम महंगाई मुद्दे पर सरकार का विरोध करने की मंशा पहले ही जता चुके हैं। वहीं भोपाल गैस कांड और उसके आऱोपियों को बचाने में कांग्रेसी भूमिका पर विपक्ष सरकार को बख्शने के मूड में बिल्कुल दिखाई नहीं देता। खुद कांग्रेस के अंदर ही इस मुद्दे पर चल रही खींचतान विपक्ष के लिए मजबूत आधार बन सकते हैं। वहीं भ्रष्टाचार का मुद्दा भी सरकार के लिए किसी सरदर्द से कम नहीं है। यह तो ऐसे मुद्दे हैं जिन पर समूचा विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। लेकिन बीजेपी के पास सीबीआई के गलत इस्तेमाल किये जाने का मुद्दा भी कम अहम नहीं है। गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के पीछे बीजेपी कांग्रेसी हाथ होने का इल्जाम लगा रही है और इस मुद्दे पर मॉनसून सत्र की बैठकों की कुर्बानी भी दी जा सकती है। हालांकि सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी सफाई दे दी है। लेकिन बीजेपी इस मुद्दे को इतनी आसानी से ठंडा होने देने के मूड में नहीं दिख रही। बहरहाल, विपक्ष की तैयारियों को देखते हुए लगता नहीं कि सरकार के लिए मॉनसून सत्र आसानी भरा साबित होने वाला है।
वैसे तो विपक्ष के पास मुद्दों के तमाम तोहफे हैं, लेकिन वह एकजुट है महंगाई के नाम पर। सरकार से मुकम्मल जवाब की दरकार है उसे, वरना विपक्षी बादल बरसने से चूकेंगे नहीं। कम से कम तेवर तो यही कहते हैं। संसद के मॉनसून सत्र की औपचारिक शुरुआत तो सोमवार को हो गई लेकिन करगिल शहीदों के अलावा दो दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद सोमवार को शुरू होने वाले दोनों ही अधिवेशन मंगलवार तक के लिए टाल दिये गए। लेकिन महंगाई के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट है और वह मंगलवार को सरकार के खिलाफ स्थगन प्रस्ताव लाने का ऐलान कर चुका है। महंगाई के मुद्दे पर बीजेपी के साथ हां में हां मिलाने के लिए समूचा विपक्ष एकजुट है। जेडीयू ने भी काम रोको प्रस्ताव लाने का ऐलान कर दिया है। ऐसा ही कुछ तेवर वामपंथी खेमे का भी है। वामपंथी खेमा भी महंगाई पर सरकार को बख्शने के मूड में नहीं दिख रहा। सरकार के लिए मुश्किलें उनके धुर विरोधी ही नहीं खड़ी कर रहे, बल्कि आड़े वक्त में सरकार के काम आ चुके मुलायम और पासवान जैसे दोस्त भी महंगाई मुद्दे पर ताल ठोंकते नज़र आ रहे हैं।
विपक्ष के तेवर को देखते हुए कांग्रेस को भी मॉनसून सत्र के हंगामेदार होने का अंदाज़ा लग चुका है। ऐसे में कांग्रेस ने भी ऐलान कर दिया है कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। कांग्रेस को तो विपक्ष के तेवरों का अंदाज़ा हो ही चुका है। खुद लोकसभा की स्पीकर को भी इस मुद्दे की अहमियत का अंदाज़ा है। उनका मानना है कि अगर बीजेपी स्थगन प्रस्ताव लाती है तो उस पर विचार किया जाएगा। इस बार महंगाई मुद्दे पर जिस कदर विपक्ष जिस कदर एकजुट दिख रहा है उसे देखते हुए सरकार के लिए मॉनसून सत्र मुसीबतों का सत्र साबित होता दिख रहा है। अब देखना यह है कि विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव पर सरकार विपक्ष का सामना किस तरह करती है।
सीबीआई के इस्तेमाल का आरोप लगा रही बीजेपी ने शाह मुद्दे पर पिछले कुछ दिनों में जिस तरह अपने तेवर कड़े किये हैं, उससे कांग्रेस और केंद्र सरकार दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। संसद के मॉनसून सत्र में बीजेपी कहीं इसे मुद्दा न बना ले इसके लिए खुद पीएम ने कमान संभालते हुए इल्जामों पर अपनी सफाई पेश कर दी है। शाह को सीबीआई ने सींखचों के पीछे क्या पहुंचाया बीजेपी ने इसे मुद्दा बना लिया। उनकी नजर में सीबीआई की सारी कारगुजारियां कांग्रेसी इशारों पर अंजाम दी जा रही हैं। अपनी बात को बीजेपी साबित करने के लिए कांग्रेस पर यह इल्जाम भी लगा रही है कि सीबीआई का अब तक गलत इस्तेमाल करती आई है कांग्रेस।
सीबीआई के इस्तेमाल पर ऐसा नहीं कि केवल बीजेपी ही हमलावर है, बल्कि वाम खेमा भी कांग्रेस को सीबीआई के इस्तेमाल के मामले में बेदाग़ नहीं मानता। सीबीआई के सियासी इस्तेमाल का ये इल्जाम कांग्रेस के लिए कितना अहम है इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि सत्र की शुरुआत से पहले खुद प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी। सीबीआई को कांग्रेस जांच ब्यूरो बताए जाने के बीजेपी के आरोप को उन्होंने बेबुनियाद बताया और कहा कि शाह के मामले में केंद्र का कोई हाथ नहीं। यह पहला मौका है जब सरकार पर सीबीआई के सियासी इस्तेमाल के इल्जाम पर खुद पीएम को सफाई देनी पड़ी। वजह साफ थी कि सरकार नहीं चाहती कि बीजेपी इसे संसद के मॉनसून सत्र में कोई मुद्दा बनाए, लेकिन बीजेपी के तेवर अभी भी नरम नहीं पड़े हैं। भले ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में फंसे अमित शाह के मसले पर समूचे विपक्ष का उसे सहयोग न मिले, लेकिन वह इसे मुद्दा बनाने से शायद ही बाज़ आए। ऐसे में मानसून सत्र का अहम हिस्सा सीबीआई के बेजा इस्तेमाल के नाम पर कुर्बान होने का खतरा अभी भी टला नहीं है।
एनडीए ने मॉनसून सत्र के दौरान सरकार की नाक में दम करने की पूरी तैयारी कर ली है। एनडीए की मीटिंग में सत्र के दौरान की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। महंगाई को लेकर जहां पूरा एनडीए बीजेपी के साथ खड़ा है, वहीं अमित शाह के मसले पर जेडीयू पीछे हट गई है। ऐसे में बीजेपी अकेले अमित शाह के मसले पर संघर्ष करेगी, लेकिन सीबीआई के दुरुपयोग का मुद्दा सबसे साथ मिलकर उठाएगी। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में उनके घर पर हुई एनडीए की इस बैठक में मानसून सत्र के दौरान सदन की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए इस सत्र के दौरान एक बार फिर महंगाई को ही अपना सबसे अचूक हथियार के तौर पर ही सामने रखेगा।
महंगाई को लेकर एनडीए लोकसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है, जबकि राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा कराने की मांग करेगी। महंगाई के बाद बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण अमित शाह का मामला है, इसलिए इस बैठक में सहयोगी दलों की मंशा भी टटोली गई। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह मसले पर बाकी सहयोगी तो बीजेपी के साथ हैं, लेकिन जेडीयू ने बिहार चुनावों और नरेन्द्र मोदी से नीतीश कुमार के खराब संबंधों के चलते इस मसले पर साथ देने से इनकार कर दिया। ऐसे में बीजेपी ने एनडीए के फोरम से केवल सीबीआई के दुरुपयोग का मुद्दा उठाने की रणनीति तैयार की है, जबकि अमित शाह का मसला पार्टी अपने स्तर से उठाएगी। जाहिर है महंगाई के मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहा एनडीए अमित शाह के मुद्दे पर बिखरा दिखाई दे रहा है। इससे कहीं न कहीं नीतीश सरकार की वह रणनीति कामयाब दिखाई दे रही है, जिसमें वे नरेन्द्र मोदी से बिहार चुनावों में प्रचार नहीं कराना चाहते। एनडीए की इस रणनीति के बाद यह भी साफ है कि मॉनसून सत्र हंगामेदार रहेगी।
संसद का मॉनसून सेशन हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष महंगाई के मसले पर स्थगन प्रस्ताव पर जोर देगा। हालांकि, गुजरात के मसले पर विपक्ष में दरार है, लेकिन बीजेपी ने कहा है कि हमारे स्थगन प्रस्ताव को विपक्ष का साथ मिलने की उम्मीद है। महंगाई, भोपाल, भारत-पाक वार्ता, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में देरी जैसे मुद्दों से लैस विपक्ष से सरकार कैसे पार पाएगी। वहीं, सत्ता पक्ष के पास विपक्षी एकता तोड़ने के लिए हिंदू आतंकवाद और महिला आरक्षण विधेयक जैसे कुछ हथियार हैं, लेकिन विपक्ष के आक्रामक तेवरों के आगे मानसून सत्र में सरकार का टिकना आसान नहीं होगा।