Wed Jul 28 2010 21:40:02 GMT+0530 (India Standard Time)
खेलों के बहाने कोई और खेल चल रहा है शायद। संसद में तैयारियों पर विपक्ष सवाल उठाने की तैयारी में हैं। लेकिन कमियों पर तो घर में ही सवाल उठने लगे हैं। संसद में विपक्ष बरसता इसके पहले बाहर बरसने लगे बादल। लेकिन ये बादल विपक्षी नहीं, कांग्रेसी हैं। मणि की हसरत तो यही है कि "गर्क हो जाए बेड़ा।"
कॉमनवेल्थ खेलों के शुरू होने में अब तकरीबन दो महीने का ही वक्त बचा है। लेकिन इस बार कांग्रेस की तरफ से ही तैयारियों के मद्देनजर मोर्चा खोल दिया गया है। बारिश से तैयारियों पर असर पड़ा तो कांग्रेसी सांसद मणिशंकर अय्यर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने सिर्फ कॉमनवेल्थ खेलों के बेड़ा गर्क होने का शाप ही नहीं दिया, बल्कि खेलों के आयोजन के लिए रिश्वत देने का संगीन इल्जाम भी लगा डाला। कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन दिल्ली के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। कॉमनवेल्थ खेलों को लेकर दिन रात एक कर चुके खेल मंत्रालय और दिल्ली हुकूमत दोनों के लिए वक्त रहते तैयारियों को पूरा कर लेना सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन विपक्ष इन तैयारियों पर आए दिन सवाल उठाता ही रहता है। ऐसे में जब खेलों में ज्यादा दिन बाकी नहीं हैं।
बरसात ने तैयारियों पर असर क्या डाला कांग्रेसी सांसद मणिशंकर अय्यर के चेहरे पर खुशी की लकीरें दिखने लगीं। रुकावट से वे इतने खुश हैं कि बस पूछो मत। इतना ही नहीं मंत्री जी ने तो कॉमनवेल्थ खेलों का बेड़ा गर्क होने का शाप दे दिया। मणिशंकर अय्यर की नीयत साफ है। वे नहीं चाहते कि कॉमनवेल्थ खेल कामयाब हों और इसके पीछे उन्हें पैसे की बर्बादी और कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन हासिल करने के लिए इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे तमाम देशों को लाखों डॉलर की रिश्वत पेश करने का इल्जाम भी लगा डाला। जब सत्ता पक्ष से ही खेलों की तैयारियों पर इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हों तो मुद्दा बना रहे विपक्ष को ताकत तो मिलनी ही थी।
तैयारियों में हो रही देरी विपक्ष के लिए मॉनसून सत्र के दौरान संसद में उठाया जाने वाला मसला नजर आने लगा है। मणिशंकर अय्यर का तेवर पहले भी बेहद आक्रामक रहा है। लेकिन कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों को लेकर सरकार और खेल मंत्रालय पर निशाना साधने की तैयारी कर रहे विपक्ष को उनके इस बयान से खासा मुद्दा भी हासिल हो गया है। ऐसे में जब खुद कांग्रेसी सांसद ही खेलों के आयोजन को लेकर इस तरह की बयानबाजी करने लगे हों तो विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में कैसे पीछे रह सकता है। अब देखना यह है कि मणिशंकर का ये बयान क्या रंग लाता है।
मणिशंकर अय्यर के राष्ट्रमंडल खेलों का बेड़ा गर्क होने के बयान के सामने आने के बाद राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी शख्सियतों की प्रतिक्रियाएं समने आने लगी हैं। कांग्रेस और खेलों से जुड़े लोगों के लिए मुश्किल ये है कि इस बार उन्हें विरोधियों को ही जवाब नहीं देना है बल्कि खुद अपने खेमे के अय्यर का भी मुंह बंद कराना है। मणिशंकर अय्यर का बयान बेड़ा गर्क करने वाला बयान खेलों का कितना बेड़ा गर्क करेगा ये तो अक्टूबर में सामने आएगा जब राष्ट्रमंडल खेल शुरू होंगे। लेकिन इस बयान का असर तो पड़ना ही था। ऐसे में जब जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के उद्घाटन के मौके पर खेल मंत्री एमएस गिल दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ पहुंचे तो उनसे ये सवाल उठना ही था।
जवाब में खेल मंत्री बिना कुछ बोले भी बहुत कुछ बोल गए। खेलों के आयोजन समिति से जुड़े लोगों के लिए भी अय्यर का बयान उन्हें भड़काने के लिए काफी है। ऐसे में खेलों के आयोजन समिति के सचिव भला कैसे चुप रह सकते थे। अय्यर उनके भी निशाने पर आ गए हैं। अय्यर के बयान से कलमाड़ी तो बेहद गुस्से में आ गए दिखते हैं, उनकी नजर में अय्यर का बयान राष्ट्रविरोधी बयान है। कुल मिलाकर देखें तो अय्यर का बयान सत्ता पक्ष और खेलों के आयोजन कमेटी के लिए मुसीबत का सबब तो बना ही है। उनके गुस्से का सबब भी बन गया। ऐसे में अब देखना दिलचस्प है कि तैयारियों को अमली जामा पहना रहा महकमा अपने फर्ज को अंजाम वक्त रहते दे पाता हैं या नहीं। उसकी हर नाकामी अब विपक्ष के साथ- साथ अय्यर जैसे घर के लोगों के लिए भी मुद्दा बन सकती है।
एक तरफ तो तैयारियों में देरी का इल्जाम और दूसरी तरफ स्टेडियमों के तैयार होने का दावा। इन दावों के बीच उनके उद्घाटनों का दौर भी जारी है। लेकिन इन तैयारियों में कहीं कुछ ऐसा तो छूट ही रहा है जो विश्व स्तरीय स्टेडियमों की तैयारी पर सवाल खड़ा करता है। स्टेडियम के सामने जमा पानी वर्ल्ड क्लास स्टेडियम की तैयारियों का पोल खोल रहा है। तीन अक्टूबर को कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन समारोह आयोजित होना है। दावा है कि स्टेडियम पर दिल्ली ही नहीं पूरे हिंदुस्तान को नाज़ होगा। मंगलवार को स्टेडियम के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद हाजिर होने पहुंचीं। लेकिन सुबह हुई बारिश ने वर्ल्ड क्लास स्टेडियम की कलई खोल दी। आनन- फानन में सामने लगे पानी को हटाने की कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री ने स्टेडियम को बड़े गौर से देखा। इसी दरम्यान खेल मंत्री एमएस गिल भी स्टेडियम पहुंच गए। उन्हें भी स्टेडियम की खूबसूरती ही दिखाई दी। वहां जमा पानी उन्हें नजर नहीं आया। बकायदा स्टेडियम का उद्घाटन किया गया और तैयारियों की बाबत जमकर कसीदे पढ़े गए। दिन रात मेहनत कर रही कर्मचारियों और अथॉरिटी की तारीफ की गई। खुद खेल मंत्री मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने तैयारियों की बाबत अपनी तसल्ली ही जाहिर की। उद्घाटन के मौके पर स्टेडियम के हर हिस्से का दौरा किया गया। लोअर लॉबी एरिया से पानी टपकता रहा और तैयारियों पर सवाल खड़ा करता रहा। लेकिन मुख्यमंत्री को तैयारियों पर तसल्ली है। उन्होंने खेलों की सभी तैयारियों के लिए डेडलाइन भी तय कर दी है। 31 अगस्त तक वे खेलों के लिए हर तरह की तैयारियों को पूरा कर लेने का दावा करती हैं। खेलों की तैयारी को लेकर डेडलाइन तय किये जा रहे हैं। लेकिन खेलों के आयोजन करनेवाले स्टेडियमों की हालत उन तैयारियों की हकीकत बयां करती है।
डर है कि पूरी तरह से तैयार हो चुके स्टेडियम के एक हिस्से से टपक रहा पानी दिल्ली का पानी न उड़ा ले जाए। अगर यही आलम रहा तो वर्ल्ड क्लास स्टेडियमों का दावा करने में जुटी दिल्ली सरकार तो शर्मसार होगी ही हिंदुस्तान को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी। ऐसा नहीं कि अय्यर राष्ट्रमंडल खेलों पर अय्यर की जुबान पहली बार खुली हो। बल्कि कई बार ऐसे मौके आए हैं जब अय्यर ने आरोपों की बौछार खेलों के आयोजन को लेकर की है। कभी फिजूलखर्ची के बहाने तो कभी वेश्यावृत्ति के इल्जाम चस्पा करके। ऐसा नहीं कि अय्यर ने पहली दफा राष्ट्रमंडल खेलों की बाबत अपनी मर्जी जाहिर की है। बल्कि ऐसे कई मौके आए हैं जब अय्यर के बोल खेलों के आयोजन समिति और खुद खेल मंत्रालय का मज़ाक उड़ा चुके हैं। चंद दिनों पहले उन्होने कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन पर ही फिजूलखर्ची का इल्जाम चस्पा कर दिया था।
इतना ही नहीं तैयारी के लिए दिल्ली की सड़कों की मरम्मत और उन्हें विश्व स्तरीय बनाये जाने पर भी अय्यर ऐतराज़ जता चुके हैं। लेकिन मणिशंकर का हाल ही में आये एक बयान से उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई। हुआ यूं कि खेलों के आयोजन के मद्देनज़र जब कंडोम की बिक्री में तेज़ी आने की बात उठी तो पूरी तरह से बिफर उठे मणिशंकर उन्होंने इन खेलों को एक तरह से वेश्यावृत्ति में बढ़ावा देने से ही जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि सुना है लाखों कंडोम बिक चुके हैं और इसकी जमाखोरी हो रही है। दुनिया भर से खिलाड़ी कौन सा खेल खेलने आ रहे हैं? अब यह तो नहीं पता कि मणिशंकर की नाराजगी और कॉमनवेल्थ खेलों की आयोजन समिति से उनकी नाराज़गी का सबब क्या है? लेकिन अय्यर के ये बोल इतना तो जाहिर करते ही हैं कि खेल मंत्रालय की हर नाकामी उनके लिए खुशी का सबब जरूर है। अब यह कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है तो इससे अय्यर को कोई फर्क नहीं पड़ता।
इसके पहले कॉमनवेल्थ खेलों के चेयरपर्सन माइक फेनेल ने भी तैयारियों को लेकर दिल्ली को लताड़ लगाई थी। उन्होंने वेन्यू दिल्ली की बजाय कहीं और शिफ्ट करने की बात भी कही थी। लेकिन बाद में उनको तैयारियों की बाबत तसल्ली हो गई। ऐसे में विपक्ष भी तैयारियों को लेकर सवाल उठाता रहा है। लेकिन इस बार तो हद हो गई। मणिशंकर अय्यर कभी खुद खेल मंत्रालय संभाला करते थे। आज खुद खेलों की नाकामयाबी की हसरत पाल रहे हैं। आपस की नाराज़गी कहीं सचमुच खेलों का बेड़ा गर्क न कर दे।